राजकीय आत्मनिर्भर मंदिर श्री गोगा जी, गोगामेड़ी

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शाश्वत विरासत

1000 वर्षों की दिव्य विरासत

इस मंदिर की भव्य वास्तुकला का निर्माण महाराजा गंगा सिंह ने करवाया था, जिसमें प्राचीन आध्यात्मिक परंपराओं और शाही शिल्पकारी का अद्भुत मेल देखने को मिलता है। यह आस्था का एक ऐसा प्रमाण है, जो दस शताब्दियों की कसौटी पर खरा उतरा है।

इतिहास

एक सहस्राब्दी से भी अधिक पुरानी जड़ें।

वास्तुकला

बेहतरीन सफ़ेद संगमरमर की कारीगरी।

लाइव दर्शन

गोगाजी महाराज की दिव्य उपस्थिति का अनुभव अब दुनिया के किसी भी कोने से करें।

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बैंक

खाता नाम : देवस्थान विभाग राजस्थान उदयपुर

खाता संख्या : 37540819464

आईएफएससी कोड : SBIN0031823

बैंक : स्टेट बैंक ऑफ इंडिया

श्री गोगाजी का परिचय

श्री गोगाजी एक चौहान योद्धा थे।इनका जन्म चौहान वंश के शासक जेवर सिंह के यहाँ लगभग विक्रम संवत् 1003 ई. में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की नवमी को चुरू जिले के ददरेवा गाँव में हुआ।इनकी माता का नाम बाछल था।ये गुरु गोरखनाथ के प्रमुख शिष्य हुए।इन्हे साँपों का देवता भी माना जाता है।

मंदिर परिचय

श्री गोगाजी मंदिर, गोगामेड़ी हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय से लगभग 120 किलोमीटर स्थित है।यह मंदिर देवस्थान विभाग राजस्थान सरकार द्वारा प्रबंधित एवं नियंत्रित राजकीय आत्मनिर्भर श्रेणी मंदिर है।मंदिर लगभग 1000 वर्ष पुराना है।ऊँचे स्थान, ऊँचे टीले पर स्थित होने से 'गोगामेड़ी' नाम प्रचलित हुआ।

वास्तुकला

तत्कालीन बीकानेर महाराजा श्री गंगा सिंह जी द्वारा 26 जून 1911 को मिश्रित शैली में सफेद संगमरमर से जीर्णोद्धार करवाया गया।श्री गोगाजी की समाधि पक्के सफेद संगमरमर से निर्मित है।समाधि के पूर्व भाग में मूर्ति दिग्दर्शित है, जिस पर घोड़े पर सवार गोगाजी, घोड़े के आगे नाहरसिंह पाण्डे व घोड़े के पीछे भज्जू कोतवाल एवं सूर्य-चाँद उत्कीर्ण है।मंदिर परिसर में नाहरसिंह पाण्डे कुण्ड, नाहरसिंह पाण्डे थान, नगाड़ा, भज्जू कोतवाल, रानी सिरियल समाधि, माता बाछल समाधि एवं सब्बलसिंह थान है।राजस्थान सरकार द्वारा सन् 2016 से 2019 तक मंदिर जीर्णोद्धार करवा मंदिर को विस्तृत एवं वर्तमान स्वरूप दिया गया।